SOCIAL AND POLITICS



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लेखक: आयुष शर्मा
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बाबा राम रहीम की बर्बादी की शुरुआत अप्रैल 2002 में उस वक्त शुरू हुईं. जब एक गुमनाम खत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा गया था. इस खत में एक पीड़िता ने बाबा की काली करतूतों का खुलासा किया था.


इसी के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लिया और बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या था उस खत में कि प्रधानमंत्री से लेकर हाई कोर्ट तक कोई भी खुद को रामरहीम पर कार्रवाई से नहीं रोक सका.
दरअसल पीड़िता ने अपने लेटर में लिखा था कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा में साधु लड़की के रूप में कार्य कर रही हूं. सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 16 से 18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा यौन शोषण किया जा रहा है. इसमें आगे लिखा था मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.
इतना ही नहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री को लिखे इस पत्र में आगे बाबा राम रहीम को लेकर जो कुछ कहा गया था वो बेहद हैरान करने वाला है क्योंकि इससे पता चलता है कि बाबा की एक अलग ही दुनिया थी. इस लेटर में आगे लिखा था कि साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्य साधु गुरजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि महाराज ने गुफा बुलाया है. क्योंकि मैं पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है.
लेकिन गुफा में जाकर जो कुछ मैंने देखा वो मेरे लिए हैरान और परेशान करने वाला था, गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा कि महाराज बेड पर बैठे हैं. उनके हाथ में टीवी का रिमोट है, और सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं ये सब देख कर हैरान रह गई. मुझे लगा कि जैसे मेरे पांव के नीचे की ज़मीन खिसक गई है क्योंकि बाबा का ये रूप मैं पहली बार देख रही थी. इसके बाद साध्वी के सामने बाबा ने जो ख्वाहिश रखी..उसे सुनकर साधवी के होश उड़ गए.
बाबा के यौन शोषण का शिकार हुई पीड़िता की दर्दनाक दास्तान यहीं खत्म नहीं होती..क्योंकि जिस बाबा को उसने परमात्मा का दर्जा दिया था..उसने उसका यौन शोषण एक दो बार नहीं बल्की महीनों तक किया. साथ ही जब पीड़िता ने इसका विरोध किया उसे जान से मारने की धमकी दी गई |










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कोन हे अमिताभ बच्चन के असली पिता और महात्मा गाँधी और इंदिरा के नाजायज  सम्बन्ध










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लेखक: आयुष शर्मा8233194639 -

  1. लोकतंत्र में जय उसी की होती है , जिसकी ज़रूरत सबसे ज़्यादा होती है।
  2. लाल बहादुर शास्त्री जी ने 1965 के युद्ध में जय जवान का नारा लगाया और हरित क्रांति के दौर में जय किसान का। और , सफल परमाणु परीक्षण के बाद अटल जी ने जय विज्ञान का नारा गढ़ा। लेकिन , सवाल है कि जय जवान , जय किसान और जय विज्ञान के बीच आज किसान कहां पर खड़ा है ?
  3. क्या किसान आज सचमुच जय की हालत में है ? एक जवान की मौत पर सारा देश एक साथ सवाल खड़े करता है , लेकिन पिछले 20 वर्षों में लाखों किसानों की आत्महत्या पर हर तरफ़ खामोशी छाई है। ऐसा क्यों? जय किसान का नारा लगाने वाले इस देश में आ़खिर किसानों की आत्महत्या राष्ट्रीय मुद्दा क्यों नहीं बन पाई ?  



बिना सोचे समझे लिए गए फैसले से आखिर क्या मिला जानने के लिए देखे वीडियो

लेखक: आयुष शर्मा
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8 नवम्बर 2016 रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काले धन के खिलाफ नोट बंदी की
घोषणा कर सामान्तर अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए लोगो की नजरो में सबसे बड़ा दाव खेला। इस आक्रमक अभियान का उद्देश्य कालाधन रखने वालों को सबक सिखना और नशे के कारोबार तथा तस्करी, आतंकवाद और उग्रवाद की गतिविधियों के लिए अवैध लेन-देन इत्यादि गतिविधियों को समाप्त करना बताया गया था।

1 comment:

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